कुशीनगर: प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए संदीप पाण्डेय ने फूंका बिगुल; 27 अप्रैल से चलेगा ‘शैक्षणिक उत्थान अभियान’

तमकुहीराज (कुशीनगर)। पूर्वांचल के प्रखर रणनीतिकार, वरिष्ठ संपादक और युवा समाजसेवी संदीप पाण्डेय ने अब प्राथमिक शिक्षा की बदहाली को दूर करने के लिए कमर कस ली है। आगामी 27 अप्रैल से तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र में एक व्यापक ‘शैक्षणिक उत्थान जागरूकता अभियान’ चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था में सुधार करना और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
शिक्षकों की जवाबदेही पर उठाया सवाल
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए संदीप पाण्डेय ने कहा कि प्राथमिक स्तर के शिक्षकों पर बच्चों की बुनियादी शिक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:यदि शिक्षक केवल ‘कोरमपूर्ति’ करते हैं और बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं देते, तो बच्चों की असफलता का सीधा दोष उन पर जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों का यह नैतिक और संवैधानिक उत्तरदायित्व है कि वे स्थापित मानकों के अनुरूप मानकीकृत शिक्षा प्रदान करें और हर बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस कदम उठाएं।”
लचर व्यवस्था और निजी स्कूलों की मनमानी पर कड़ी प्रहार।

संदीप पाण्डेय ने क्षेत्रीय सर्वेक्षण के आधार पर बताया कि अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक केवल हाजिरी लगाकर गायब हो जाते हैं या समय काटते हैं। इसी लापरवाही के कारण सरकारी स्कूल पिछड़ रहे हैं।
उन्होंने बिना मान्यता के चल रहे निजी स्कूलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में ‘कुकुरमुत्तों’ की तरह खुले निजी स्कूल अभिभावकों और बच्चों का आर्थिक व मानसिक शोषण कर रहे हैं। इन गंभीर मुद्दों को लेकर उन्होंने BSA कुशीनगर से वार्ता की है, जिस पर प्रशासन ने दोषियों को चिन्हित कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
संदीप पाण्डेय केवल एक रणनीतिकार ही नहीं, बल्कि एक सजग समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं। वे अपनी लेखनी और सक्रियता के माध्यम से स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी और पर्यावरण जैसे मूलभूत अधिकारों के लिए निरंतर आवाज उठाते रहे हैं। उनका यह नया अभियान शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की उम्मीद जगा रहा है।





