बनवीरा में रामज्ञानी फाउंडेशन का हुआ भव्य उद्घाटन।

शक्ति कुमार ✍️
कुशीनगर। तमकुहीराज विकास खण्ड के ग्राम बनवीरा में सोमवार को रामज्ञानी फाउंडेशन की आधिकारिक घोषणा एवं संस्था के प्रतीक चिह्न (लोगो) के विमोचन का कार्यक्रम भव्यरूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामवासी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। उक्त कार्यक्रम में जरूरतमंद लोगों का सहयोग किया गया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 से तमकुहीराज बरियारपुर निवासी युवा समाजसेवी ओजस्वी मिश्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता, स्वास्थ्य सेवाओं, रक्तदान और मेधावी व जरूरतमंद छात्रों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अहर्निश कार्य किए जा रहे थे। इन्हीं प्रयासों को संगठित रूप देने के लिए अब रामज्ञानी फाउंडेशन की नींव रखी गई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के संस्थापक समाजसेवी ओजस्वी मिश्र ने कहा कि आप सबके सहयोग से अब तक 91,111 पौधों का वितरण, 1000 से अधिक लोगों को रक्त उपलब्ध कराना तथा सड़क सुरक्षा के लिए 1100 से अधिक हेलमेट वितरण जैसे कार्य संपन्न किए जा चुके हैं और ये अनवरत जारी रहेंगे एवं प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति, धर्म,वंश और संप्रदाय से हो तत्पर सेवा दिया जाएगा।
संस्था के डायरेक्टर प्रशांत शाही ने रामज्ञानी फाउंडेशन की स्थापना की प्रेरक यात्रा और उसके सामाजिक उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक राम प्रसाद लाल श्रीवास्तव को पूर्वांचल गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया। श्श्रीवास्तव ने संस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसके सामाजिक कार्यों की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। अन्य वक्ताओं में समाजसेवी जितेंद्र प्रजापति ने समाज के प्रति प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।
विकास श्रीवास्तव ने युवाओं की सामाजिक भागीदारी और उनके दायित्वों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर शिक्षक विनोद राय, जितेंद्र प्रजापति, विकास श्रीवास्तव, विपिन शाही, सुनील शाही, अरुण मिश्रा, जय प्रकाश राय, सद्दाम खान, इस्राफील, सैफ अली, सुरेश प्रसाद, संतोष, साकिब , पवन, अनुज, शत्रुध्न, शक्ति आदि सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे।




