कुशीनगर,जनसेवा की नई मिसाल: तमकुहीराज की राजनीति में जन-जन की उम्मीद बनकर उभरे संजय गुप्ता।

कुशीनगर। तमकुहीराज विधानसभा ३३१। राजनीति अक्सर पद और पावर के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक ऐसा चेहरा चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसने बिना किसी पद पर रहे केवल अपनी सेवा और समर्पण से जनता के दिलों में जगह बनाई है। हम बात कर रहे हैं संजय गुप्ता की, जिन्हें आज क्षेत्र की जनता ‘गरीबों का साथी’ और ‘सच्चा जनसेवक’ मान रही है।
जमीनी संघर्ष से उपजा नेतृत्व
संजय गुप्ता की सबसे बड़ी शक्ति उनका जमीनी अनुभव है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जिसने खुद बाढ़ और कटाव की विभीषिका झेली हो, वही घर उजड़ने का दर्द समझ सकता है। संजय गुप्ता के व्यक्तित्व की खासियत यह है कि वे आज भी किसानी और मजदूरी से जुड़े संघर्षों को भूलते नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बनाकर किसानों और मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
आमतौर पर नेता चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच जाते हैं, लेकिन संजय गुप्ता ने एक नई लकीर खींची है। वे किसी भी राजनीतिक पद पर नहीं हैं, फिर भी सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता किसी भी जनप्रतिनिधि से कम नहीं है। चाहे वह:गरीब कन्याओं का विवाह हो, आगजनी पीड़ितों की तत्काल सहायता हो, या कड़ाके की ठंड में कंबल वितरण।
वे हर मोर्चे पर जनता के साथ खड़े नजर आते हैं। युवाओं के बीच वे एक दोस्त की तरह लोकप्रिय हैं, तो बुजुर्गों के लिए सम्मान और छोटों के लिए उनके मन में अगाध प्रेम है।
वर्तमान राजनीति में जहाँ जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला है, वहीं संजय गुप्ता ने खुद को इन कुरीतियों से दूर रखा है। उनके परिवार या रिश्तेदारों में कोई भी किसी राजनीतिक पद पर नहीं है। उन्होंने राजनीति को ‘चमकने’ का माध्यम नहीं बल्कि ‘सेवा’ का जरिया बनाया है, जहाँ न कोई भेदभाव है और न ही कोई जातिगत समीकरण।
उम्मीद का नया चेहरा आज तमकुहीराज की जनता उन्हें अपनी ‘प्रबल उम्मीद’ के रूप में देख रही है। संजय गुप्ता का कहना है कि वे खुद को ‘मसीहा’ नहीं बल्कि ‘गरीबों का साथी’ मानते हैं। यही सादगी और निस्वार्थ भाव उन्हें आज क्षेत्र का सबसे उभरता हुआ और विश्वसनीय चेहरा बना रहा है।





