
एडिटर इन चीफ शक्ति कुमार ✍️
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘मित्र पुलिस’ का दावा किया जाता है, वहीं कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया थाने से एक ऐसा मामला सामने आया है जो खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहाँ ग्राम प्रधान और सचिव के भ्रष्टाचार की शिकायत करने पहुँचे एक युवक को पुलिसिया कार्रवाई के बजाय दरोगा की अभद्रता का सामना करना पड़ा।
शिकायत पर कार्रवाई के बजाय ‘गाली-गलौज’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक अपने ग्राम सभा के प्रधान और सचिव द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत लेकर थाना नेबुआ नौरंगिया पहुँचा था। युवक का आरोप है कि उसकी शिकायत पर संज्ञान लेकर जांच करने के बजाय, दरोगा संदीप यादव ने उल्टा रुख अपना लिया।
दरोगा जी थाने में तो चुप रहे, लेकिन इसके बाद वे दलबल के साथ सीधे शिकायतकर्ता के गाँव पहुँच गए। आरोप है कि वहाँ उन्होंने युवक की शिकायत को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए सार्वजनिक रूप से उसे ही भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं और डराया-धमकाया।
भ्रष्टाचार की ढाल बनी पुलिस?
ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि पुलिस का काम अपराध और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है, न कि शिकायतकर्ता का मुँह बंद करना। युवक का कहना है कि उसने साक्ष्यों के साथ प्रधान और सचिव के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन दरोगा संदीप यादव के व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि वे आरोपियों को संरक्षण दे रहे है
विवाद का कारण: ग्राम प्रधान और सचिव के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायत करना।
पीड़ित का आरोप: घर पहुँच कर गाली-गलौज करना और शिकायत पर कार्रवाई न करना।

उठते सवाल
“क्या अब उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अपराध हो गया है? अगर रक्षक ही भक्षक बनकर आरोपियों का पक्ष लेंगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी?”
इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में पुलिस के प्रति अविश्वास देखने को मिला।
अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर आरोपी दरोगा और भ्रष्टाचार में लिप्त प्रधान-सचिव पर क्या कार्रवाई करते हैं।




