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गोपालगंज सासामुसा चीनी मिल चालू होने की उम्मीद बढ़ी: निरानी ग्रुप चेयरमैन और अपर मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण। 

शक्ति कुमार ✍️ 

सत्येंद्र बैठा ने अपर मुख्य सचिव को गुलदस्ता देकर किया स्वागत।

गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड स्थित सासामुसा चीनी मिल के दोबारा संचालन की उम्मीद एक बार फिर जगी है। शुक्रवार को गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के.

सेंथिल और निरानी ग्रुप के चेयरमैन मुर्गेश निरानी सहित कई अधिकारियों ने बंद पड़ी मिल का निरीक्षण किया। इस पहल को मिल के पुनरुद्धार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

दरअसल, बिहार सरकार ने राज्य की 25 बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में निरानी ग्रुप की टीम गोपालगंज पहुंची और मिल परिसर का जायजा लिया।

हेलीकॉप्टर से पहुंचे चेयरमैन

निरानी ग्रुप के चेयरमैन मुर्गेश निरानी पहले पटना पहुंचे, जहां से वे विभागीय अधिकारियों के साथ हेलीकॉप्टर से गोपालगंज आए। उनके साथ अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल और गन्ना उद्योग विभाग के आयुक्त जेपीएन सिंह समेत कई स्थानीय अधिकारी मौजूद थे।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मिल की जमीन, पुरानी मशीनरी और अन्य संसाधनों का बारीकी से अवलोकन किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय किसान भी अपनी उम्मीदों के साथ पहुंचे।

निरानी ग्रुप चेयरमैन, अपर मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण।

अभी केवल निरीक्षण, निर्णय बाद में मुर्गेश निरानी ने बताया कि उनकी कंपनी कर्नाटक की प्रमुख गन्ना उत्पादक कंपनियों में शामिल है और बिहार में भी उनकी दस मिलें संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी देश की दूसरी सबसे बड़ी गन्ना उत्पादक कंपनी होने का दावा करती है।

उन्होंने यह भी बताया कि सीतामढ़ी स्थित रीगा चीनी मिल को पुनः चालू करने की दिशा में पहले से प्रयास जारी हैं। सासामुसा मिल के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल निरीक्षण किया जा रहा है।

निरीक्षण के बाद कंपनी के अधिकारियों के साथ आंतरिक बैठक होगी, जिसके पश्चात बिहार सरकार के मंत्री और विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी।

बैठक के बाद ही यह तय होगा कि मिल का अधिग्रहण या पुनः संचालन किस मॉडल पर किया जाएगा।

मुर्गेश निरानी ने बताया कि सासामुसा मिल के पास लगभग 40 से 45 एकड़ भूमि है, जबकि कुछ जमीन लीज पर ली गई है। उन्होंने संकेत दिया कि यहां केवल गन्ने से चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि चावल और मक्का किसानों के उत्पादों से भी बायो-प्रोडक्ट तैयार करने की योजना है।

उनके अनुसार, इस मॉडल से गन्ना किसानों के साथ-साथ धान और मक्का उत्पादक किसानों को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ सकती है, जिस पर सरकार से बातचीत की जाएगी।

बकाया भुगतान पर सरकार कर रही विचार

अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान किसानों और पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर

भी चर्चा हुई। सरकार इस पहलू पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है।

हादसे के बाद बंद हुई थी मिल

गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 के दिसंबर माह में मिल परिसर में बॉयलर के पास लगा उपकरण फटने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें छह मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद मिल में भारी विवाद हुआ और कुछ समय बाद संचालन ठप हो गया।

बाद में प्रशासनिक प्रयासों से एक सीजन के लिए पेराई कार्य शुरू हुआ, लेकिन फिर मिल बंद हो गई। तब से यह चीनी मिल बंद पड़ी है।

फिलहाल ताजा निरीक्षण के बाद क्षेत्र के किसानों और श्रमिकों में एक बार फिर उम्मीद जगी है।

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